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देश भक्ति-काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु कविता

शहीदों के खून की खुशबू मिटने नही देगे, 

हम अपने परचम को कभी झुकने नही देगे |

हमे लुटने के दर्द का अहसास हो चुका है, 

बमुश्किल सम्हले है आबरू लुटने नही देगे |

एक बार बहकावे में हमने घर बाँट दिया, 

अब आँगने में कोई दीवार बनने नहीं देगे |

दुनियाँ में आजादी से बड़ी कोई नेमत नहीं है, 

ये शहीदों की अमानत है बिखरने नही देगे |

बापू के चमन में अमन के पंकज खिलेगे,

हम किसी सैय्याद को बसेरा करने नहीं देगे |

आजाद फिजाओ में लहरायेगा तिरंगा , 

हम अपने परचम की साँस घुटने नही देगे |

पंकज कुमार श्रीवास्तव

स्वरचित मौलिक रचना