तुम ये मत समझों
कविता
तुम ये मत समझो चीन
कि राफेल के आने से
हम एकाएक
ताकतवर हो गए है
हमने सिर्फ तकनीक
और आयुध में इजाफा किया है तुम्हे ज्ञात ही होगा
हमारा इतिहास और
नही पता हो तो
जाकर अपने नए एशियाई
साथी से पता कर लो
ये वो भारत है
जहाँ के जर्रे जर्रे में
कायनात है
जिस धरती पर
प्रभु राम, कृष्ण और गौतम बुद्ध
ने जन्म लिया हो
वह अब भला ,
ड्रेगन से क्या डरेगा
गलवान घाटी से भी
ज्यादा खौफनाक
हमारे यहाँ
चंबल की घाटी थी
जो हर समय
आग उगलती थी
हमने उस आग को
साहस से शांत किया है
क्योंकि हममे
हिमालय सा पुरूषार्थ
और हिंद महासागर सा धैर्य है अभी हमने सिर्फ व्यापार
और
ऐप ही बंद की है
हमारे सब्र का
और इम्तिहान मत लो ड्रेगन क्योंकि हममे
भाखड़ा नंगल जैसी विशालता और
बैलाडिला जैसी मजबूती भी है ।
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रचना मौलिक अप्रकाशित एवं अप्रसारित है ।
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अनिल गुप्ता
कोतवाली रोड़ उज्जैन