चलते रहना ही जीवन है…!
शीर्षक : “चलते रहना ही जीवन है”
देख हिमालय सी कठिनाई,
क्यूं राहों का परित्याग किया,
अथक परिश्रम करते करते,
बढ़ते रहना ही जीवन है…!
चलते रहना ही जीवन है…!!
ठहराव अगर जल में हो,
जल की निर्मलता कैसे हो…??
पग पग ही सही… पल पल ही सही,
बहते रहना ही जीवन है…!
चलते रहना ही जीवन है…!!
एकांत वरण कर लोगे तुम,
अवसाद ग्रसित हो जाओगे,
व्यक्तित्व निखर पाए तेरा,
मिलते रहना ही जीवन है…!
चलते रहना ही जीवन है…!!
अन्याय कपट की लंका में,
रावण ही रावण भरे पड़े,
राम – भाव के अस्त्रों से,
लड़ते रहना ही जीवन है…!
चलते रहना ही जीवन है…!!
चीर हरण करने वाले,
अगनित दुर्योधन बैठे हैं,
ऐसे कापुरूषों असुरों से,
भिड़ते रहना ही जीवन है…!
चलते रहना ही जीवन है…!!
हो लाख कठिन कठिनाई,
मानव का जन्म मिला हमको,
गिर कर उठना, उठ कर चलना,
प्रभु से वरदान मिला हमको,
जीवन के हर इक दुख में बस,
हसते रहना ही जीवन है…!!
चलते रहना ही जीवन है…!!!
सादर,