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चलो मिलते हैं

चलो कहीं मिलते हैं,

पल दो पल की ज़िन्दगी जीते हैं ।

 कुछ तुम कहो , कुछ हम कहें , 

ज़माने की अनसुनी करते हैं । 

हाथों में हाथ लिए बैठते हैं, 

ना कस्मे ना वादे , 

रस्मो- रिवाज़ो को तोड़ते हैं । 

चल ना यार ,

कहीं दू….. र ..चले जाते हैं

– रोशनी