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कुछ कोलाब- खास रिश्ते

कुछ कोलाब- खास रिश्ते

(काेलाब मन के वो भाव हैं जो मन मस्तिष्क से होते हुए हमें उत्साहित करते हुए, नई खुशियों के साथ परिवर्तन की चेतना प्रदान करते हैं।)

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कुछ रिश्ते खास होते हैं
भीड़ से अलग पहचान रखते हैं
कोई हो या चाहे न हो
हर पल मन से साथ होते हैं
फायदे नुकसान की दुनिया में
बेफिक्र से थामे हाथ रखते है
छाया बन धूप से बचाते
बरगद की छाँव सा फैलाव रखते हैं

2
काश ! कुछ ऐसा हो जाए
बिन कहे तू सब सुन जाए
बिन बोले हर बात समझ जाए
बिन देखे मुझको पढ़ जाए
बिन जाने मेरा हाल समझ जाए
काश ! कुछ ऐसा हो जाए
तेरे लबों से मेरा नाम छू जाए
मेरे हाथों में तेरा हाथ लहरा जाए
तेरे कदम मेरे संग चल जाएं
मेरी हर श्वास संग तू रच बस जाए
काश ! कुछ ऐसा हो जाए … –

3
तुम्हारा साथ चलना
कदमों से कदमों का मिलना
हाथों में थामे हाथ हमारा आगे बढ़ना
न कुछ कहना न कुछ सुनना
एक दूजे को कहना
एक दूजे को सुनना
आडंबरों से परे अपनी दुनिया रचना

 

कवयित्री परिचय –

मीनाक्षी डबास “मन”
प्रवक्ता (हिन्दी)
राजकीय सह शिक्षा विद्यालय पश्चिम विहार शिक्षा निदेशालय दिल्ली भारत
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माता -पिता – श्रीमती राजबाला श्री कृष्ण कुमार

प्रकाशित रचनाएं – घना कोहरा,बादल, बारिश की बूंदे, मेरी सहेलियां, मन का दरिया, खो रही पगडण्डियाँ l
उद्देश्य – हिन्दी भाषा का प्रशासनिक कार्यालयों की प्राथमिक कार्यकारी भाषा बनाने हेतु प्रचार – प्रसार l