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देशभक्ति काव्य लेखन प्रतियोगिता

श्रद्धांजलि

आज मेरा दिल उन वीरों को

श्रद्धांजलि देने के लिए,

अपने आप ही नतमस्तक है,

जिन्होंने अपने प्राणों की

बाज़ी लगाने में तनिक भी

संकोच नहीं किया,

पलटकर सूनी माँग,

सूनी कलाइयों को नहीं देखा,

सुबकते बच्चों, नम आँखों

को नहीं देखा,

माँ की ममता को, गले तले

उतार कर, बाप की लाठी को

उसके हाथों में ही थमाकर,

चल दिये भारत माँ की

रक्षा के लिए,

आज भारत माँ ही नहीं, समूचा

देश तुम्हारा, तुम्हारी जननी का ऋणी है

तुम्हें झुक-झुक कर असंख्य

बार प्रणाम करता है,

करता रहेगा।

तुम धन्य हो, वीर हो,

अमर हो, रहती दुनिया तक

तुम्हारी वीरता का ये

चर्चा चलता रहेगा।