संवाद होना चाहिए…!!
रिश्तों की डोर में,
हो तनाव जब ज्यादा,
टूटने को आतुर,
और खिचाव हो ज्यादा,
बादलों का क्षितिज पर,
इक झुकाव होना चाहिए…!
तोड़ कर खामोशियां,
संवाद होना चाहिए…!!
तोड़ कर खामोशियां,
संवाद होना चाहिए…!!
अहम का वर्चस्व हो,
और विवेक शून्य हो कभी,
भय के प्रभाव में,
विचार शून्य हो सभी,
दंभ की दीवार से,
इक रिसाव होना चाहिए…!
नीर के बहाव सा,
संवाद होना चाहिए…!!
नीर के बहाव सा,
संवाद होना चाहिए….!
प्रीत की दीवार पर,
द्वेष का ना रंग हो,
प्रीत की मीनार पर,
प्रीत की तरंग हो,
राग पर अनुराग का,
इक प्रभाव होना चाहिए…!
सरगमों के स्वर सा इक,
संवाद होना चाहिए…!!
सरगमों के स्वर सा इक,
संवाद होना चाहिए…!!
अनीति हो जहां कहीं,
नीति को हम राह दें,
पाप की हो बस्तियां,
तो पुण्य को पनाह दें,
कुकृत्य लिप्त दैत्य से,
इक विवाद होना चाहिए…!
मौन भाव त्याग कर,
संवाद होना चाहिए…!!
मौन भाव त्याग कर,
संवाद होना चाहिए…!!
सादर🙏