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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव का अध्ययन।

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अनुराधा तँवर
शोधार्थी, हितकारी सहकारी महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय
धाकड़खेड़ी, कोटा

सारांश – प्रस्तुत शोध में उच्च माध्यमिक स्तर के राजकीय व निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों का भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव पर अध्ययन किया। जिसमें शोधार्थी को प्राप्त हुआ कि निजी विद्यालय के विद्यार्थी राजकीय विद्यालय के विद्यार्थियों की अपेक्षा अपने भविष्य को लेकर अधिक तनावग्रस्त होते हैं। इन विद्यार्थियों में भी छात्राएँ छात्रों की अपेक्षा अधिक तनावग्रस्त रहती हैं। इस समस्या के समाधान के लिये शिक्षा को तनावमुक्त बनाना चाहिये। विद्यार्थियों को अंक प्रणाली पर नहीं माप कर उनकी प्रतिभा को ध्यान में रखते हुए उनके सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जाना चाहिए।

बीज  शब्द – उच्च माध्यमिक, भविष्य, तनाव

प्रस्तावना – वर्तमान युग औद्योगिकरण, शहरीकरण, प्रौद्योगिक का युग है। इस युग में बदले सामाजिक मूल्यों के कारण पश्चिमी होड़ में शामिल होने के कारण, समाज में ज्ञान के स्थान पर ‘भौतिकवाद’ का प्रभाव ज्यादा हो गया है इन सब के कारण सामाजिक जटिलताएँ अधिक हो गई है इन सब से मानव जीवन में तेज रफ्तार से थकान और तनाव बढ़ता जा रहा है। वर्तमान समय में मनुष्य को प्राय: तनावजन्य स्थितियों का सामना करना पड़ता है। अपने भविष्य को लेकर हर मनुष्य के मन में कई प्रकार के प्रश्न होते हैं जिनमें आकांक्षा, उत्साह, प्रसन्नता, भय, तनाव हर स्थिति होती है।

उच्च माध्यमिक कक्षा में पहुँचते ही विद्यार्थी अपने आने वाले भविष्य को लेकर कई प्रकार के सपने बुनने लगता है वह हमेशा अपने उज्जवल भविष्य की कामना करता है।

भविष्य के बारे में हमें सकारात्मक दृष्टिकोण रखना आवश्यक है क्योंकि जब तक हमारा सोचने का तरीका सकारात्मक नहीं होगा तब तक हम भविष्य को लेकर आशावान नहीं हो पायेंगे।

आंतरिक एवं बाह्य बाधाएँ मनुष्य के उद्देश्यों की प्राप्ति में अवरोध डालती है। कभी ये बाधाएँ सामान्य होती है जिनका सामना सरलता से किया जा सकता है किन्तु कभी ये बाधाएँ मानव को तनाव ग्रस्त करती है।

हर विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर बहुत चिन्तित व निराशा में रहता है एक असंतोष की भावना उसमें हमेशा रहती है, कि वह किस प्रकार से अपने भविष्य को उज्ज्वल व स्वर्णिम बना सकता है।

समस्या का औचित्य –

उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों में भविष्य को लेकर हमेशा तनाव द्वन्द्व का वातावरण रहता है इसी को जानने के लिये यह शोध किया गया है।

शोध के उद्देश्य –

प्रस्तुत अध्ययन के उद्देश्य निम्नलिखित हैं –

  1. राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव का अध्ययन के प्रति जागरूकता का अध्ययन
  2. राजकीय व निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव का अध्ययन के प्रति जागरूकता का अध्ययन करना।
  3. राजकीय विद्यालयों के छात्रों व छात्राओं में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव का अध्ययन के प्रति जागरूकता का अध्ययन करना।
  4. निजी विद्यालयों के छात्रों व छात्राओं में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव का अध्ययन के प्रति जागरूकता का अध्ययन करना।

परिकल्पना –

शोध के लिए परिकल्पनाएँ निम्न है –

  1. उच्च माध्यमिक स्तर पर राजकीय व निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव के अध्ययन के प्रति जागरूकता में कोई सार्थक अन्तर नहीं होता है।
  2. निजी विद्यालय में छात्रों व छात्राओं में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव के अध्ययन के प्रति जागरूकता में कोई सार्थक अन्तर नहीं होता है।
  3. राजकीय व निजी विद्यालयों के छात्रों में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव के अध्ययन में कोई सार्थक अन्तर नहीं होता है।

परिसीमन –

इस अध्ययन के लिए हमने कोटा क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले निजी एवं सरकारी विद्यालयों में किया।

अनुसंधान विधि –

शोध की प्रकृति, सर्वेक्षण की मौलिकता व उपयोगिता के आधार पर शोधकर्ता ने सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया है।

न्यादर्श –

”सौउद्देश्य यादृच्छिक प्रतिचयन विधि” के द्वारा उच्च माध्यमिक विद्यालय के 80 विद्यार्थियों का चयन किया गया। जिसमें से 40 विद्यार्थी राजकीय विद्यालय एवं 40 निजी विद्यालय के थे। इन 40 विद्यार्थियों में 20 छात्र एवं 20 छात्राएँ शोध हेतु न्यादर्श के रूप में चयनित की गई –

प्रस्तुत शोध में प्रयुक्त उपकरण –

शोधकर्ता ने प्रस्तुत शोध हेतु स्वनिर्मित ”अध्यापक अभिभावक सम्बन्ध का प्रभाव प्रश्नावली” का निर्माण किया।

विश्लेषण एवं व्याख्या –

सारणी 1

राजकीय व निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव के अध्ययन के प्रति जागरूकता का मध्यमान, मानक विचलन व टी-मान

चर/समूह N

 

मध्यमान

 

मानक विचलन T-Value

 

निष्कर्ष

 

राजकीय विद्यार्थी 40 62.00 6.42 2.714 सार्थक अन्तर है।
निजी विद्यार्थी 40 65.45 4.84

इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि राजकीय व निजी विद्यालय के विद्यार्थियों में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव के अध्ययन के प्रति जागरूकता में अन्तर होता है।

सारणी 2

राजकीय विद्यालय व निजी विद्यालय के छात्रों में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव के अध्ययन के प्रति जागरूकता के मध्यमान मानक-विचलन व टी-मान

चर/समूह N

 

मध्यमान

 

मानक विचलन T-Value

 

निष्कर्ष

 

राजकीय छात्र 20 64.70 5.08 0.453 सार्थक अन्तर नहीं है।
निजी छात्र 20 65.40 4.68

इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि राजकीय व निजी विद्यालयों के छात्रों में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव के प्रति जागरूकता में कोई सार्थक अन्तर नहीं होता है।

सारणी 3

राजकीय व निजी विद्यालयों की छात्राओं में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव के अध्ययन के प्रति जागरूकता के मध्यमान मानक-विचलन व टी-मान

चर/समूह N

 

मध्यमान

 

मानक विचलन T-Value

 

निष्कर्ष

 

राजकीय छात्राएँ 20 59.30 6.59 3.325 सार्थक अन्तर है।
निजी छात्राएँ 20 65.50 5.10

इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि राजकीय व निजी विद्यालयों की छात्राओं में भविष्य को लेकर बढ़ते हुए तनाव के प्रति जागरूकता में सार्थक अन्तर होता है।

निष्कर्ष –

  1. निजी विद्यालय के छात्र राजकीय विद्यालय के छात्रों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक चिन्तित होते हैं वे अपने भविष्य को लेकर तनाव अधिक लेते हैं।
  2. राजकीय विद्यालय व निजी विद्यालय के छात्र दोनों ही अपने भविष्य को लेकर चिन्तित रहते हैं। अपने भविष्य को लेकर वे दोनों समान रूप से तनावग्रस्त होते हैं।
  3. निजी विद्यालय की छात्राएँ अपने आने वाले भविष्य को लेकर अधिक विचारवान होती हैं जबकि उनकी तुलना में राजकीय विद्यालय की छात्राएँ कम विचार करती है। वह तनाव में कम रहती हैं, अपने भविष्य को लेकर।

सुझाव –

विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान भी प्रदान किया जाये जिससे विद्यार्थी अपने जीवन में आने वाली समस्याओं का स्वयं समाधान करने में सक्षम बन सकें। साथ ही विद्यालयों में बाल मनोविज्ञान को समझने वाले विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जा सकती हैं।

सन्दर्भ सूची

  1.  शिक्षा की पत्रिका, नया शिक्षक January – June, 2002 writer Eg. Ebele Egbule James.
  2.  सुकुल, श्रीमती पूनम : नई शिक्षा – ”भारतीय किशोरों में बढ़ता मानसिक तनाव” (10-11 May-June 2003)
  3.  बत्रा, दीनानाथ : शैक्षिक मंथन – ”आत्महत्या – कारण और निवारण”, (1 October, 2010)
  4.  झा, निशा : शैक्षिक मंथन – ”भविष्य की पीढ़ी पर आघात” (1 October, 2012)
  5.  भार्गव, महेश : आधुनिक मनोवैज्ञानिक परीक्षण एवं मापन, एच.पी. भार्गव बुक हाउस, आगरा – 2003
  6.  कपिल, (डॉ.) एच.के. : अनुसंधान विधियाँ, एच.पी. भार्गव बुक हाउस, बारहवां संस्करण
  7.  पारिक, राधेश्याम : कैरियर, शिक्षक एवं उसकी उपलब्धि शिविरा पत्रिका, वरिष्ठ संपादक, बीकानेर, जनवरी 2005

Last Updated on January 4, 2021 by srijanaustralia

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