न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

प्रेम-काव्य लेखन प्रतियोगिता

  कविता 

********

तुम कैसे हो?

अब नहीं कह पाती हूँ, 

जीवन की आपा -थापी में 

निश्चल अनुराग के इस बंधन में 

संग पीरों कर तुझ संग,

अपने मन के तारों से 

अक्सर उलझ-उलझ कर मैं, 

आस की तस्वीर लिए ,

यादों के तट से तटिनी बन कर, 

कह न सकी तुमसे ये 

“मेरे जीवन हो”

या जीवन जैसे हो |

प्रीत की धारा में बह कर 

कल्पना के सागर में ,

सर्द हवाओ में, 

ठिठुरती आँगन में पड़ती धूप हो !

या वक्त की क्यारी में सिमटे हुए 

तन्हाईयों के दामन से लिपटे 

मेरी आँखों में बसे स्वप्न जैसे 

जाने कैसे हो ? 

अब नहीं कह  पाती हूँ 

कि तुम कैसे हो?

तुम कैसे हो ?

डॉ कविता यादव 

Last Updated on January 19, 2021 by drkavitayadav42

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

More to explorer

आँगन में खेलते बच्चे

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱आँगन में खेलते बच्चे आँगन में खेलते रंग-बिरंगे बच्चे,लगते कितने प्यारे कितने अच्छे !फूलों-सी मुस्कान है-चेहरों परऔर

देखो मेरे नाम सखी

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱देखो मेरे नाम सखी “   प्रियतम की चिट्ठी आई है देखो मेरे नाम सखी विरह वेदना

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *