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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

यूँ मायूस मत बैठो

यूँ मायूस मत बैठो ।

यूँमायूस मत बैठो, हँसों मुस्कुराओं दोस्तों ।
ख़्वाब से निकलो हक़ीक़त में आओ दोस्तों ।।

एक उम्र गुज़ार दी ज़माने वालों के काम देखते-देखते;
अब बारी तुम्हारी है-कुछ कारगुज़ारी करके दिखाओ दोस्तों ।

फूलों की मासूम-महक़ती वादियों में बहुत रह लिए;
अब काँटों में रहने का हुनर भी सीखों और सिखाओ दोस्तों ।

चाँद-सितारों को घर तक लाना जब ना हो मुमकिन;
तो जुगनुओं से ही अपने सहन को सजाओ दोस्तों ।

दौलत और शोहरत के ढेर लगा कर क्या करोगे;

बस,सदाकत-हक़गोई पर फ़ना हो जाओ दोस्तों ।

दुनियाँ वाले तो चाहेंगे ही-आपको हर बार गिराने की;
पर ख़ुद को ख़ुद की नज़र से कभी मत गिराओ दोस्तों ।

मंदिर मस्जिद में जाकर क्यों वक़्त ज़ाया करते हो;
जब क़ाबलियत है तुममें , पहले ख़ुद को ख़ुदा बनाओ दोस्तों ।

खैर इस ‘दीप के साये तले भी अंधेरे ही पनपते हैं;
बेहतर होगा ख़ुद को चाँद-सूरज की तरह चमकाओ दोस्तों ।

यूँ मायूस मत बैठो, हँसों मुस्कुराओं दोस्तों ।
ख़्वाब से निकलो हक़ीक़त में आओ दोस्तों ।।

रचनाकार – संदीप कटारिया (करनाल,हरियाणा)

Last Updated on February 18, 2021 by sandeepk62643

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1 thought on “यूँ मायूस मत बैठो”

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