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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

काश तुम होते

काश तुम मेरी ज़िंदगी में जो होते
ज़िंदगी से इतनी शिकायत न होती।।

वफ़ा ज़िंदगी में बेवफाई न होती मोहब्बत के हम भी मसीहा ही होते जिंदगी में इतनी रुसवाई न होती।।

काश तुम मेरी जिंदगी में जो होते जिंदगी से इतनी शिकायत न होती।।

ख्वाहिसों कि चाहत हकीकत की जिंदगी इश्क कि इतनी दीवानगी न होती ।।

काश तुम मेरी जिंदगी में जो होते जिंदगी से इतनी शिकायत न होती।।

जूनून जिंदगी का मकसद कि मंजिल तूफां कि मंजिलों से इतनी शिकायत न होती।।

काश तुम मेरी जिंदगी में जो होते जिंदगी से इतनी शिकायत न होती।।

जिंदगी में दोस्त कम दुश्मन बहुत दोस्तों से शिकवा दुश्मनो कि इतनी इनायत न होती।।

जज्बों कि जिंदगी रिश्तों का जहाँ रिश्तों में इतनी कवायत न होती।।

काश तुम मेरी जिंदगी में जो होते जिंदगी से इतनी शिकायत न होती।।

नादा मोहब्बत निभाने का वादा कशमकश कि जिंदगी में कशिश इबादत न होती।।

काश तुम मेरी जिंदगी में जो होते जिंदगी से इतनी शिकायत न होती।।

जिंदगी का सफर आरजू की ख़ुशी
जिंदगी गम के आंसुओ कि सुराही न होती।।

काश तुम मेरी जिंदगी में जो होते जिंदगी से इतनी शिकायत न होती।।

जिंदगी ख़ुशी गम कि साकी शराब जिंदगी नशा गम जुदाई न होती।

काश तुम मेरी जिंदगी में जो होते जिंदगी से इतनी शिकायत न होती।।

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

Last Updated on February 14, 2021 by nandlalmanitripathi

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