न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

हे मेघ…हृदय के भाव सुनो…!!!

हे मेघ…! हृदय के भाव सुनो…!!
_________________________
निर्जन वन के पुनर्सृजन को,
हे मेघ…! घुमड़ के आ जाओ,
मन की दुर्बलता पर सघन वृष्टि,
बादल बन कर तुम छा जाओ…!

विश्वास विकल दुर्बल हृदय,
इस एकांत और सूनेपन में,
हे मेघ…! प्रबल गर्जन लिए,
सुप्त हृदय को जगा जाओ…!

भावहीन बंजर सा मन,
हर क्षण दुविधा के पाश में,
हे मेघ…! सुमन वर्षण लिए,
जीवन को महका जाओ…!

अडिग अचल निष्ठुर शरीर,
प्रिय के अभाव में श्वास हीन,
हे मेघ…! वायु सा वेग लिए,
प्राण वायु बरसा जाओ…!

संगीत हीन अब हृदय मेरा,
ना राग का अब अनुराग बचा,
कल कल ध्वनि अब लिए मेघ,
मल्हार राग तुम बन जाओ…!

हृदय मध्य के प्रेम भाव,
अदृश्य बांध से बंधे हुए,
हे मेघ…! घोर वर्षा ले कर,
तुम एक प्रवाह सा दे जाओ…!

प्रिय बिन सम्पूर्ण नहीं “ऋषि”,
व्याकुल मन के कुछ भाव सुनो,
हे मेघ…! प्रेम के पथ पर अब,
इक सरस राह तुम बन जाओ…!!

सादर🙏🙏

Last Updated on January 22, 2021 by rtiwari02

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