न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

हाइकु

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माँ हो कर ही

जाना जा सकता है

माँ का होना भी

 

काँधे पे पेट

सिर पर गठरी

कोरोना यात्रा

 

धूप से लड़े

हमको छाया देने

पिता सा पेड़

 

जीवन छोड़

लाशों को ही चाहती

ये गिद्ध वृति

 

उलूक यारी

उजाले की क़ीमत

अंधेरा तारी

 

अयानों हेतु

सयानों का छलावा

मौत भी मोक्ष

 

बैल ? तो कोल्हू

जो खाने हों बादाम ?

बन जा मिट्ठु ।

 

फिर पुकारे

मन अँगुलीमाल

आओ ना बुद्ध !

 

पेड़ पिता

सौंपते अंतस भी

फले औलाद

 

पेड़ से पन्ना

पन्ने पे माँडा पेड़

बचाने पेड़

 

धेले बिकते

इंसान यहाँ पर

महँगाई है ?

 

नहीं कहता

वो जो नहीं सहता

कथा बिवाई

 

लगे इधर

और मिले उधर

राज की नीति

 

यक़ीं का खेल

माटी की गुल्लक में

सोने के सिक्के

 

बिन लश्कर

प्यार से जग जीते

वो कलंदर

 

मेघ गठरी

बाँटे पनियाँ मोती

कहाए वर्षा

 

बढ़ती हुई

जनसंख्या दिखाती

आदमी कमी

 

मर्जी हमारी

जब चाहे कह  दें

गधे को बाप |

 

टँगोगे उल्टा

जब कभी करोगे

वल्गल यारी |

छुपती रहे

दम्भ चढ़ी, पाँ जली

फूँकूँ रावण

Last Updated on September 25, 2021 by rnbanyala

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