न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

मेरे हमसफ़र

मेरे हमसफ़र

मैं तेरी जीवनसंगिनी तू मेरे सिर का ताज
कल की विपदा सोच क्यों खोये हो आज

साथी हूँ‌ तेरे पथ की हरपल चलूं तेरे संग
कौन झूठलाए प्रेम बंधन जो तेरा मेरे संग

प्रेम चाह में जलना, पतंगा शम्मा में जल जाए जैसे
प्रेम हो भंवरे का मिलना फूलों में सिमट जाए जैसे

प्रेम अमर है मुझसे तेरा, फिर खो ना दूं क्यों लगता है ?
अटूट विश्वास तुझ पर,फिर ना जाने मन क्यों डरता है ?

ओ मेरे हमसफ़र तेरे कदमों पर चलना चाहूं
तुझ में खोकर तेरी होकर रहना चाहूं

भूल गई सब साथी संगी, जब हुआ तेरा दीदार
एक तरफ दुनिया के सारे सुख, दूजी ओर तेरा प्यार

जी चाहता है जीवनभर प्रेम ज्योति जलाऊं
तेरे प्रेम की धुन में मग्न हो, कोई गीत गुनगुनाऊंँ

तू मेरे मन की संवेदना, लिखना चाहूं शब्द नहीं है इतने
सोच ना पाओगे तुम, मुझमें बसे हो तुम कितने?

तुझ संग जीवन, तुम बिन तड़पन
सुख पाऊं तुमसे सारे, तुझको जीवन अर्पण

मुख जब भी देखूँ मेरे प्रिय को, मानो सूर्य का तेज
तुझ में बसै ज्यों सांवरा, मेरे मन बसे पिया रंगरेज

कवयित्री
पिंकी ‘हरि’ भार्गव
माता पिता- श्रीमती सुमित्रा, श्री मनीराम भार्गव

हिंदी भवन
कराला दिल्ली

Last Updated on April 4, 2021 by bhargavahari22

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3 thoughts on “मेरे हमसफ़र”

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