न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

विस्मृति

सुनहरी सजीली भोर, सुहानी नहीं आई,
तरुणों में उत्साह की, रवानी नहीं आई।
नवयुवक को नभ देख रहा है आशा से,
जिंदगी चलने लगी, जिंदगानी नहीं आई।।

लिखनी तुम्हें अपनी, कहानी नहीं आई,
चादर प्रेम – स्नेह की, बिछानी नहीं आई ।
निसंदेह हुए हो सम्मुख, तुम इस वतन से,
आबरू तुम्हें वतन की, बचानी नहीं आई ।।

हृदय की प्रबल अनल, जलानी नहीं आई,
सत्य चक्षुजल की धारा, बहानी नहीं आई ।
विस्मृत कर दिया, जनहित इस समाज से,
जवान तो हो गए, पर जवानी नहीं आई ।।

देशद्रोह की जड़ें, हिलानी नहीं आई,
विद्रोह की चट्टानें, गिरानी नहीं आई ।
अविराम प्रवाहित, रक्त-धारा धरा से,
लुटना सीख गये, कुर्बानी नहीं आई।।

लेखक – उमेश पंसारी, सीहोर, मध्यप्रदेश 

Last Updated on May 6, 2021 by umeshpansari123

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

More to explorer

रश्मिरथी

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱जा रे जा,जिया घबराए ऐ लंबी काली यामिनी आ भी जा,देर भई रश्मिरथी मृदुल उषा कामिनी काली

मोटनक छन्द “भारत की सेना”

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱(मोटनक छन्द) सेना अरि की हमला करती।हो व्याकुल माँ सिसकी भरती।।छाते जब बादल संकट के।आगे सब आवत

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *