न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

स्मृति अब अवशेष नहीं…!!!

स्मृति अब अवशेष नहीं,
स्मृति अब अवशेष नहीं…!!!

सृजित हुई यादें तेरी,
इक पल में भी इक काल सदृश,
घोर शीत के ऋतु के मध्य,
थी जैसे कोई शाल सदृश,
मैं चकोर सा व्याकुल,
मुख मंडल तेरा चन्द्र सदृश,
भ्रमर सदृश मैं मंडराता,
तुम जैसे कोई पुष्प अदृश्य,

प्रेम पुष्प के उपवन में,
सुगंध कोई निःशेष नहीं,
स्मृति अब अवशेष नहीं,
स्मृति अब अवशेष नहीं…!!!

इक प्रश्न करूं…? उत्तर दोगे…??
क्यूं उदासीन हो मेरे प्रति…?
या खिन्न भाव से प्रेरित,
बोलो इसका प्रत्युत्तर दोगे…??
या कहो भला किस बात की खातिर,
तुमने है मौन को अपनाया,
मेरे प्रेम को ठुकराकर,
खुद से खुद को क्यूं झुठलाया…??

विश्वास नहीं होता अब क्युं,
क्युं मुझसे प्रेम अशेष नहीं,
स्मृति अब अवशेष नहीं,
स्मृति अब अवशेष नहीं…!!!

दो शब्द हमारे सुन लो,
क्या कुछ और कभी अभिलाषा की,
अपनी मुस्कान का ढांढस दो,
कुछ और कभी क्या आशा की,
मैं याचक सा तुझ ओर खड़ा,
दो क्षण का ही तो वक़्त मिले,
तुम देख तो लो इक बार सही,
सांसों को थोड़ी सांस मिले…!!

मैं दिवा स्वप्न में डूबा सा,
अब कोई प्रेम विशेष नहीं,
स्मृति अब अवशेष नहीं,
स्मृति अब अवशेष नहीं…!!!

©ऋषि देव तिवारी

Last Updated on January 22, 2021 by rtiwari02

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