न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

मुझे उस ओर जाना है

मुझे उस ओर जाना है

मुझे उस ओर जाना है” कविता समस्त स्त्री वर्ग की जिजीविषा को उन्मुक्त वातावरण में जीने, खुलकर हँसने, अपने अरमानों को पूर्णता की ओर ले जाने का आह्वान करती है। 

मुझे उस ओर जाना है

 

मुझे उस ओर जाना है

जहाँ तुम हो जहाँ मैं  हूँ

जहाँ हम एक जीवन हों।

 

मुझे उस ओर जाना है

जहाँ जीवन का स्पंदन हो

मृत्यु का नहीं भय हो।

 

मुझे उस ओर जाना है

जहाँ आदि तुम्हीं अंत हो

न कोई और परिचय हो।

 

मुझे उस ओर जाना है

गगन विस्तार विस्तृत हो

न सीमाओं का बंधन हो।

 

मुझे उस ओर जाना है

जहाँ तुम एक ही तत्व हो

न भेदों का जहां गढ़ हो।

 

मुझे उस ओर जाना है

जहाँ तेरा न मेरा हो

जो भी हो हमारा हो

 

मुझे उस ओर जाना है

समष्टि का जहाँ हित हो

व्यष्टि भी वहीं युक्त हो।

 

मुझे उस ओर जाना है

जहाँ हर जीव विकसित हो

हर प्राण विलसित हो।

 

कवयित्री परिचय –

 

मीनाक्षी डबास “मन”

प्रवक्ता (हिन्दी)

राजकीय सह शिक्षा विद्यालय पश्चिम विहार शिक्षा निदेशालय दिल्ली भारत 

माता -पिता – श्रीमती राजबाला श्री कृष्ण कुमार

 

प्रकाशित रचनाएं –  घना कोहरा,बादल, बारिश की बूंदे,  मेरी सहेलियां, मन का दरिया, खो रही पगडण्डियाँ।

उद्देश्य – हिन्दी भाषा का प्रशासनिक कार्यालयों की प्राथमिक कार्यकारी भाषा बनाने हेतु प्रचार – प्रसार। 

Last Updated on February 2, 2021 by mds.jmd

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

More to explorer

आँगन में खेलते बच्चे

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱आँगन में खेलते बच्चे आँगन में खेलते रंग-बिरंगे बच्चे,लगते कितने प्यारे कितने अच्छे !फूलों-सी मुस्कान है-चेहरों परऔर

देखो मेरे नाम सखी

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱देखो मेरे नाम सखी “   प्रियतम की चिट्ठी आई है देखो मेरे नाम सखी विरह वेदना

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *