न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

महिला दिवस काव्य प्रतियोगिता

महिला दिवस काव्य प्रतियोगिता

( 1 )

नवगीत……

आओ हम विश्वास जगाएं
नारी का सम्मान बढ़ाएं
नारी गुण की खान बनी है
नारी जग की शान बनी है
सीमा पर प्रहरी बन उसने
दुश्मन का संहार किया है
आओ उसके मन आँगन में
खुशियों का विस्तार कराएं
नारी का सम्मान बढ़ाएं ।

गुड़ियों की शादी से लेकर
सखियों के संग शाला जाकर
मात पिता के साए में ही
बिटिया का बचपन बीता है
अल्हड़ वय में उड़नपरी ने
अपने सपनो को सींचा है
खेल खिलोने घर मे रखकर
मुश्किल को आसान किया है
कोमल मन की उस देवी में
साहस का नव भाव जगाएं
नारी का सम्मान बढ़ाएं ।

हिम चोटी पर वह पहुंची है
अंतरिक्ष में जा लोटी है
इंदिरा बनकर बंग्लादेश का
उसने नव निर्माण किया है
कान्हा भजन सुना मीरा ने
जन जन का उद्धार किया है
उस दुर्गा और सावित्री में
साहस का उन्वान जगाएं
नारी का सम्मान बढ़ाएं ।

घर की चौखट से जब निकली
जीवन भर संग्राम किया है
खड़ग उठाकर उस देवी ने
मातृभूमि संग न्याय किया है
पूर्वाचल से अस्ताचल तक
शोषित को अधिकार दिलाएं
महिला दिवस पर उसके शौर्य की
रक्तिम श्वेत ध्वजा लहराएं
नारी का सामान बढ़ाएं ।
…………..
अनिल गुप्ता
8, कोतवाली रोड़ उज्जैन

…..
रचना पूर्णतः मौलिक अप्रकाशित एवं अप्रसारित

नाम- अनिल गुप्ता
पदनाम – प्रधान संपादक
संगठन – महाकाल भ्रमण
पता – 8, कोतवाली रोड़ उज्जैन
मोबाइल – 9039917912

………………..

( 2 )

कविता ….

” हाँ में नारी हूँ “

हाँ में नारी हूँ
मगर मैने
यह कभीं नही कहा
कि मैं सब पर भारी हूँ
हां मुझे गर्व है में नारी हूँ
मेरा बचपन
माता पिता के साए में बिता है
सभी मुझसे जब तब
कहते थे यह मत करो
वह मत करो
मगर मेरे मन ने कहा
बेकार मत डरो सब करो
मुझे जो संस्कार घर से मिले
उसी अमूल्य निधि को
आँचल में संजोए
ससुराल की देहरी पर कदम रखा
सास ससुर और पति ने
कभी कुछ नही कहा
किन्तु
इशारों में सब कुछ समझा दिया
मेरे पैरों में मर्यादा की
जंजीर सदैव बंधी रही
तब भी जब में माँ बनी
और तब भी
जब बेटी की माँ बनी
मुझे बचपन से
यह बताया गया था कि
महिलाओं में अलौकिक
शक्ति होती है
जो दिखती नही
मगर होती जरूर है
मैने भी मान लिया
क्योंकि दिन रात बिना थके
बिना रुके हमसे
काम जो लेना होता है
हाँ यह जरूर हुआ
कि जब जब पुरुष ने
अपने अहंकार के कारण
नारी को अबला समझा
तब तब नारी ने
दुर्गा का रूप दिखाकर
उसे नारी शक्ति से
परिचित करा दिया
क्योंकि
भारतीय नारी
किसी भी परिस्थिति में
हथियार नही डालती
तब भी जब उसे
अधिकारों से लड़ना पड़े
और तब भी
जब उसकी
अस्मिता पर बेजा प्रश्न उठे
मगर तब
वह अपने पैरों में बंधी
जंजीर को तोड़कर
रणचंडी बन जाती है
माँ दुर्गा और काली की तरह ।
और गर्व से कहती है
हाँ में आत्म निर्भर
भारतीय नारी हूँ ।
……..
अनिल गुप्ता
8, कोतवाली रोड़ उज्जैन
……………………………..

रचना पूर्णतः मौलिक अप्रकाशित एवं अप्रसारित

नाम- अनिल गुप्ता
पदनाम – प्रधान संपादक
संगठन – महाकाल भ्रमण
पता – 8, कोतवाली रोड़ उज्जैन
मोबाइल – 9039917912

Last Updated on January 15, 2021 by mahakalbhramannews

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