न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

रामशरण सेठ की कविता – ‘पिता’

पिता,पिता होता है
पिता का रिश्ता अजीब होता है।

संसार में रिश्ता दूजा नहीं होता
फिर बाप का रिश्ता अनमोल होता है ।

वह उस बरगद के पेड़ जैसा होता है 
जो सबको अपने छांव में रखता है।

कष्ट तब होता है जब उस
बरगद की देख-भाल वाला कोई नहीं होता है।

सब मतलब के यार होते हैं
बरगद तो बस सबको छांव देता है।

वही छोटे-छोटे पौधों को
सींचता पालता पोषता है।

बड़े होने पर वही पौधे
छोड़ देते हैं साथ उसका।

उन पौधों को नहीं मालूम 
वह भी कभी अकेले होंगे।

उनके भी आस-पास ।
कोई नहीं होगा ।।

शरण! पिता,पिता होता है।
पिता का रिश्ता अजीब होता है।।

संपर्क :  मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश, मोबाईल : 9452373213, ईमेल पता : [email protected]*

❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️ भारत

Last Updated on January 4, 2021 by srijanaustralia

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

More to explorer

आँगन में खेलते बच्चे

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱आँगन में खेलते बच्चे आँगन में खेलते रंग-बिरंगे बच्चे,लगते कितने प्यारे कितने अच्छे !फूलों-सी मुस्कान है-चेहरों परऔर

देखो मेरे नाम सखी

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱देखो मेरे नाम सखी “   प्रियतम की चिट्ठी आई है देखो मेरे नाम सखी विरह वेदना

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *