न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

बेचारी बन्नी की मम्मी

बेचारी बन्नी की मम्मी
————————-
सुबह से रात हो जाती है,
लगी रहती है,
अपने घर को सजाने में,
बच्चे जो है बिगड़ैल,
उन्हे सँवारने में।
वह रोज अपने दो कमरे के घर में,
सेण्ट छिटकती है,
कोने-कोने- को चमकाती है,
सारे सोफा, तकिया करीने से लगाती है,
और वह बच्चा, जो आठवी में पहुँच कर भी,
शब्दों को पढ़ नहीं पता,
उसे पुचकारती है,
झिड़क देता है वह अपनी माँ को,
जैसे वह, उसकी नौकरानी हो,
सायं को अपने घर में अगरबत्ती जला कर,
जैसे किसी देवता के आने की इंतज़ार करती है,
पति घर आता है,
हुलास कर जाती है पति के पास,
जुटी रहती है, उसके तीमारदारी में,
एक मिनट के लिये भी दूर नहीं जाती उससे,
क्या पता, कब क्या माँग ले वे,
बैठी रहती है,
तब तक, जब तक,
वह अपने पान मशाला भरे मुंह से,
उसके घर की और उसकी हालत,
पहले जैसा करके पैर पसार के सो ना जाये,
फिर अगले दिन वही कहानी,
कुछ दर्द जीवन में घुल कर जिंदगी जैसे ही लगने लगते है ना [email protected] Manoranjan Kumar Tiwari

Last Updated on January 12, 2021 by Manoranjan Kumar Tiwari

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

More to explorer

काशी जाएं की काबा

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱  पंडित धर्मराज के तीन बेटे हिमाशु ,देवांशु ,प्रियांशु थे तीनो भाईयों में आपसी प्यार और तालमेल

बंटवारा

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱पंडित महिमा दत्त और लाला गजपति अपने खुराफाती दिमाग से गांव में अपना सिक्का चलाने की कोशिशों

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *