न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु “चंदा”

चंदा

                                                                            [ “हरिश्चंदा” (प्रेम की अनन्य गाथा) प्रेम काव्य कविता का नायक हरि अपनी चंदा के सौंदर्य पर कोकिला से संवाद करते हुए लेखक “हिंदी जुड़वाँ”]

कुछ तो बोलो, हरि, अपनी चंदा का हाल सुनाओ।
कैसे दिखती है तुम्हारी चंदा, जरा मुझको भी बताओ।

सुनो कोकिला मेरी चंदा, सौम्य प्रभा है प्रकृति प्यारी।
निश्छल प्रेम की गगरी, आभा सुंदर स्वर्ग से भी न्यारी।

जब जानोगे दिव्य चंदा को, तुम चंदा चंदा हो जाओगे।
सुनो हृदय निधि खोलकर, तभी चंदा को समझ पाओगे।

हे कोकिला, चंदा नहीं कोई मांसल तन की सुन्दर बाला।
चंदा भाव है विचार है स्मरण है शक्ति सौंदर्य की माला।

जिसके स्मरण मात्र से ही काव्य संसार रचते जाते हैं।
जिसके मुखमंडल को देखकर कवि मद में खो जाते हैं।

हे कोकिला मेरी प्यारी चंदा, कहीं शारदे कहीं रति ।
कहीं रमा कहीं खुशी कहीं कवि की कलम की गति।

मुखारविन्द की मंद हँसी चुरा ले जाती स्वर्ग का मोल।
खिले अम्बर अप्सराओं सम पुलकित गुलाबी कपोल ।

                                                                   चंदा का परिधान सुन्दर दिव्य, कहीं हरित कहीं लाल।                                                                   इसमें भिन्न भिन्न रंगों से सजा हुआ इंद्रपर्णी कमाल ।

छटा बिखरी रहती पान के पत्तों सी लताओं सी अद्भुत ।
इस रूप में उतर आती नित विष्णुप्रिया रूप अच्युत।

वहीं मस्तक बिंदी चमके शशि सविता को देती मात ।
शीर्षक पट्टिका मध्य दमके, भगीरथी की सुन्दर बिसात।

श्याम शेष केश सजे हिमालयी दिव्य रजनी में चमक रहे।
देख शारदे रति लक्ष्मी त्रयी देवी, देवगण भी हो रहे ठगे।

भौहें तनी धनुष के चाप में प्रकृति गांडीव उठा रही।
मृगनयनी चक्षु अति प्रिय रति रूप में हिय भा रही है।

मुख नाशिका हीर सरिस शोभा सहस्र चंद्र लगाती।
कर्ण कुंडल की आभा मन मोह हृदय छवि बनाती।

औष्ठगुलाबी लालिमा लिए, देव ललचाए, पान को तरसे।
विवृतमुख सौम्य मुस्कान पर, ठगे स्वयं काम भी हरसे l

सीने पर उभरते ऊर्जा लिए, बढ़ती उरोज की परिधि ।
दिव्य रूप को सुन्दर बनाती है यह अद्भुत दाङिम निधि l

ढका तन, लिपटा अम्बर भी अपने भाग्य पर इतराता ।
इस अनुपम छवि की पराकाष्ठा से काम भी कतराता।

                                                                   इतनी अद्भुत दिव्य श्री, मेरी चंदा, जिसका रूप अनूप ।
                                                                  इस सौंदर्यपान को तरस रहा समस्त देवमंडल का भूप l

हरिराम भार्गव “हिन्दी जुड़वाँ”
शिक्षा – MA हिन्दी, B. ED., NET 8 बार JRF सहित
सम्प्रति-हिन्दी शिक्षक, सर्वोदय बाल विद्यालय पूठकलां, शिक्षा निदेशालय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली
9829960782 [email protected]
माता-पिता – श्रीमती गौरां देवी, श्री कालूराम भार्गव
प्रकाशित रचनाएं
जलियांवाला बाग दीर्घ कविता-खण्डकाव्य (लेखक द्वय हिन्दी जुड़वाँ)
मैं हिन्दी हूँ – राष्ट्रभाषा को समर्पित महाकाव्य-महाकाव्य (लेखक द्वय हिन्दी जुड़वाँ)
आकाशवाणी वार्ता – सिटी कॉटन चेनल सूरतगढ राजस्थान भारत
कविता संग्रह शीघ्र प्रकाश्य
वीर पंजाब की धरती (लेखक द्वय हिन्दी जुड़वाँ – महाकाव्य )
उद्देश्य- हिंदी को प्रशासनिक कार्यालयों में लोकप्रिय व प्राथमिक संचार की भाषा बनाना।
साहित्य सम्मान –
स्वास्तिक सम्मान 2019 – कायाकल्प साहित्य फाउंडेशन नोएडा, उत्तर प्रदेश l
साहित्य श्री सम्मान 2020- साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्थान, मुंबई महाराष्ट्र l
ज्ञानोदय प्रतिभा सम्मान 2020- ज्ञानोदय साहित्य संस्था कर्नाटक l
सृजन श्री सम्मान 2020 – सृजनांश प्रकाशन, दुमका झारखंड।
कला शिरोमणी साहित्य सम्मान 2020- ब्रजलोक साहित्य शोध संस्थान, आगरा उत्तर प्रदेश l

Last Updated on January 10, 2021 by hindijudwaan

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