न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

नारी हूँ मैं…

Spread the love
image_pdfimage_print

महिला दिवस प्रतियोगिता हेतु कविता

“नारी हूँ मैं…” 

एक मूक अभिव्यक्ति हूं मैं,
खुद में सम्पूर्ण शक्ति हूं मैं,
विश्वास का दूसरा नाम हूं,
चलती-फिरती भक्ति हूं मैं…
हां,
नारी हूं मैं…

स्रष्टा हूँ मैं, द्रष्टा हूँ मैं,
अपनों की दुखहर्ता हूँ मैं,
जज़्बातों का ज्वालामुखी हूँ मैं,
भीतर से कोमल कली हूँ मैं।

मुझको अबला कहने वालो,
सबला की परिभाषा हूँ मैं,
टिमटिमाते दिए का तेल हूँ मैं,
निराशा की भी आशा हूँ मैं।
हां,
नारी हूं मैं…

अपने आंसू पीती हूं मैं,
अपनों के लिए जीती हूं मैं,
सबका दर्द सीने पर लिए,
अपने लब सीती हूं मैं…
हां,
नारी हूं मैं…

मैं बंधी हूं सपनों के संसार से,
अपनों के प्यार से, दुलार से,
पति की मनुहार से,
बच्चों की मुस्कान से,
मकान से
घर बन जाने वाली दीवारों से,
रग-रग में बसे
अपने घर संसार से
बंधी हूं मैं…
हां,
नारी हूं मैं…

कभी पति कभी बच्चों के लिए,
अपने अरमान दिल में दबा लेती हूं,
हंसती हूं सबके साथ,
आंसू अकेले में बहा लेती हूं,
छुपा कर अपने दु:ख-दर्द
बन्द पलकों के पीछे,
अपनी हिम्मत समेट
हंस-हंसा लेती हूं मैं…
हां,
नारी हूं मैं…

ख़्वाब देखती हूं खुली आंखों से,
खुशियों के महल सजा लेती हूं,
तिनका-तिनका जोड़ अरमानों का,
आशियाना अपना बना लेती हूं…
हां,
नारी हूं मैं…

सुलगते हैं मेरे भी जज़्बात,
सिसकते हैं मेरे भी अरमान,
कसक उठती है मेरे भी दिल में,
महकते हैं मेरे भी ख्यालात…

क्यूं न हों
आखिर इक इंसान हूं मैं,
हाड़-मांस का पुतला नहीं,
जीता-जागता, चलता-फिरता,
ईश्वर का इक चमत्कार हूं मैं,
कायनात का इक वरदान हूं मैं…

स्वाभिमान की इक मिसाल हूं मैं
हिम्मत की इक मिसाल हूं मैं,
उम्र के हर दौर को चुनौती देती,
आत्मविश्वास की इक मिसाल हूं मैं…

हां, नारी हूं मैं,
हां, नारी हूं मैं…..

****

नेहा शर्मा ‘नेह’

(स्वरचित, सर्वाधिकार सुरक्षित)

Last Updated on January 24, 2021 by neha.nks90

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

More to explorer

*युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी की पुण्य तिथि पर एक कविता*

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱*युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद*(स्वामी विवेकानंद जी के पुण्यतिथि पर समर्पित)**************************************** रचयिता :*डॉ.विनय कुमार

*वैश्विक आध्यात्मिक गुरु-स्वामी विवेकानंद जी की पुण्य तिथि पर एक लेख*

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱*वैश्विक आध्यात्मिक गुरु-स्वामी विवेकानन्द*(पुण्यात्मा स्वामी विवेकानंद जी की पुण्य तिथि पर एक लेख)****************************************  

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!