न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

देशभक्ति काव्य प्रतियोगिता

1****** “मातृ वन्दना” *****

हे जन्मभूमि, हे कर्मभूमि, हे धर्मभूमि है तुझे प्रणाम!
ऐ रंगभूमि, ऐ युद्वभूमि, ऐ तपोभूमि है तुझे प्रणाम!!

सम्प्रदायों की सरिताएँ हैं, बहु धर्मों का संगम है
है वीरों की तू क्रान्तिभूमि, ऐ क्रान्ति भूमि है तुझे प्रणाम!

जौहर की ज्वाला तुझमें है, तुझमें है शीतलता महान
ऐ महादेश, ऐ महाभूमि, तुझको है मेरा सत-सत प्रणाम !!

वीरों की तुम बगिया हो, इस बगिया के हम फूल
प्रेम,अहिंसा धर्म हमारा, यही हमारा मन्त्रमूल !!

तू धड़कन की उद्भव, हर जन की है प्राण
तुझे समर्पित तन व मन और समर्पित मेरा प्राण !!

हे जन्मभूमि, हे कर्मभूमि, हे धर्मभूमि है तुझे प्रणाम!
ऐ रंगभूमि, ऐ युद्धभूमि, ऐ तपोभूमि है तुझे प्रणाम !!
…………………………………..✍️ स्वरचित एवं मौलिक रचना:’बृजेश आनन्द राय’
2-
………….कविता………….
” भारत वन्दन “
………………………………
मरू को शस्य श्यामला कर दे, पर्वत पर जो दुर्ग बना दे;
ऐसी ‘भारत की मानस’ है, अजन्ता में बुद्धत्व जगा दे !!
टेरीकोटा से परकोटा तक, वास्तुकला स्थापित कर दे;
ये ‘आर्यावर्त का वैभव’ है, रेत को जो स्वर्णिम आभा दे !!
ऋचा में संगीत गूंँजती, महामृत्युंजय का वरण करती;
यज्ञ, शंख, ओंंकार की संस्कृति, ताण्डव को शिवत्व से भर दे !!
देववाणी आकाश -गुंजित, अट्टालिका प्रतिध्वन-निनादित;
ताल, थाप, शास्त्रीय-सनातन, अखिल विश्व झंकृत कर दे !!
वेद, ऋषि, कृषि-ज्ञान;
योग, आयुष परम्परा महान;
लोक-विद्या, विविध रंग, ‘आदि-जन-मन’, सुख सुषमा दे !!

स्वरचित एवं मौलिक ✍️ बृजेश आनन्द राय”
3:-
**************************3जागो हे भारत की युवा-शक्ति”
**********’कविता’************

“जागो हे भारत की ‘युवा-शक्ति’ !”
सिन्धु में लहर उठे,
वायु में भवर उठे,
गिरि में भूचाल है;
उत्तर क्षितिज लाल है!
जागो स्वाभिमान से,
देश के सम्मान से,
है ‘शत्रु’ दर्प तोड़ना;
गर्दन है मरोड़ना…
अब न झुकेंगे कभी,
अब न सहेंगे कभी ;
छल में जो हैं खो दिये-
वो भी पा लेंगे सभी !
मांँ भारती की ‘करने को भक्ति ‘!
जागो हे भारत की युवा-शक्ति!!
अक्साई, गलवान हो,
कश्मीर, डोकलाम हो,
द्रास, बटालिक के लिए;
चाहे भीषड़ संग्राम हो !
हम डटेंगे हर जगह ,
हम मिटेंगे हर जगह ,
अपने मातृभूमि की-
एक इंच न छोड़ेंगे जगह…!
ऐ ‘शत्रु’ ! मत घूरना,
आस्तीन मत सिकोड़ना;
भुजाएं हम तोड़ देंगे,
मस्तक हम फोड़ देंगे,
लद्दाख की बात करोगे…?
तिब्बत में चीर देंगे!
मांँ भारती से मिलती है शक्ति!
जागो हे भारत की युवा-शक्ति !!
प्रेरित हम राम से,
योगेश्वर के काम से,
बुद्ध की अहिंसा और-
नानक के गान से !
प्राचीनतम इतिहास हम,
सनातनी विकास हम;
हड़प्पा मोहन जोदड़ो की-
‘सभ्यता विकास क्रम’ !
‘हमें तुम विज्ञान दोगे…?’
( दूसरे देशों से प्रश्न )
‘तकनीकी का वरदान दोगे…?’
सीखो, आगम-वेद से ;
आर्यों के मेधा-योग से;
ऋषियों के संयम और-
त्रिपिटक के त्याग से!
अद्भुत है हमारी आत्मशक्ति!
जागो हे भारत की युवा शक्ति!!
**************************✍️बृजेश आनन्द राय *************************
कविता(गीत)शीर्षक:”गगन में गूंज रहा जयगान”

…………. गीत ……..
गगन में गूँज रहा जयगान,
मेरा प्यारा भारत देश महान!!-टेक!!
नव जागृत, नव मन प्रमुदित,
नव आत्मबल, नव पुनर्संगठित;
‘हर भारतवंशी’ – नव इच्छित
-‘देश का भविष्य में द्रुत उत्थान’!
मेरा प्यारा भारत देश महान!!
गगन में गूंज….. …. !!.1टेक
‘हिमगिरि उत्तुंग, विस्तृत सागर’,
प्रसन्न रहें,जिसके यश गाकर;
‘महापुरुषों की अमर कीर्ति-
और अन्तरिक्ष भेदता ज्ञान’!
मेरा प्यारा भारत देश महान!!
गगन में गूंज… …. !!टेक2
जहाँ पूजे जाते, जड़-जंगम,
पर्वत और नदियों का संगम;
मौसम के गीतों में रहते-
घाघ-भट्टरी के अनुमान!
मेरा प्यारा भारत देश महान!!
गगन में गूँज रहा….. …!!टेक3
नभमंडल से रविमंडल तक,
दिग्मंडल से जग मंडल तक;
भारत के विस्तृत भूमण्डल पर-
कर रहा देश अब नव-संधान!
मेरा प्यारा भारत देश महान!!
गगन में गूँज… ….महान!!टेक4
……………………………………
स्वरचित मौलिक:✍️’बृजेश आनन्द राय’
*************************
5-
कविता शीर्षक: ‘भारत देश हमारा प्यारा’
…………………………………….
……………कविता…………..
प्रगति पथ पर कर्म निरत
स्वतन्त्रता के लिए संघर्षरत
लोकतन्त्र का अनुपालक
सम्पूर्ण विश्व में न्यारा।
भारत देश हमारा प्यारा।।1।।
जनमन की है महागाथा यह
समता समरसता की भाषा यह
स्रम-संगीत सर्वहारा की
‘कृषि-प्रधान’ देश का नारा ।
भारत देश हमारा प्यारा।।
सर्वजन हिताय, बहुजन सुखाय
संस्थापित सर्व सांविधिक निकाय
‘मानवाधिकार और कर्तव्य ज्ञान’
गणतन्त्र सभी को प्यारा।
भारत देश हमारा प्यारा।।
‘गुटनिरपेक्ष-तटस्थता-सिद्धान्ता’
‘पंचशील-नियम-पालनकर्ता’
‘विश्व शान्ति का अग्रदूत’
‘वसुधैव कुटुम्बकम’ तान हमारा।’
भारत देश हमारा प्यारा।।
‘सदा सेवा में तत्पर’ भाव जहाँ पर
‘अहर्निशसेवाम्यहम’ चाव जहां पर
कर्मयोद्धाओं का गाँव जहाँ पर
‘परहित-जीवन-अर्पण’- संकल्प हमारा।
भारत देश हमारा प्यारा।
…………………………………….
स्वरचितः एवं मौलिक(C)’:-✍️बृजेश आनन्द राय’जौनपुर(उ.प्र.)*****************************************
…………………………… …
6:-
……..”कविता”………..
………………………………..”बच्चों के लिए”…………….

  • अपने सुकर्मों की पहचान बनो तुम
    इक अनुशासित इंसान बनो तुम
    जिस पर गर्व करे यह देश तुम्हारा
    ऐसे नागरिक महान बनो तुम !!
    पढ़ो, लिखो, कूदो, खेलो
    सबसे तुम अच्छा बोलो
    दुर्भावना से रहकर दूर सदा
    सबकी शुभेच्छा तुम पा लो !!
    सबके प्रिय होवो! सबके दुलारे
    दुख-सुख मेंं बनो तुम सबके ‘सहारे’
    प्रियदर्शी, समदर्शी हो जाओ
    बनो भारत माँ के आँख के तारे !!
    सदाचार श्री राम का पा लो
    स्वयं को महावीर,बुद्ध बना लो
    अम्बेडकर की समता हो तुममे
    गाँधी जी के धैर्य को पा लो !!
    क्रांति की राह, सत्य की राह हो
    सत्य-सत्य बस सत्य की चाह हो
    सत्य हो जीवन, अर्पण सत्य हो
    सत्य के लिए समर्पण सत्य हो !!
    टैगोर, बंकिमचंद की प्रतिभा हो
    शरत, प्रेमचन्द की करुणा हो
    तुलसी का समभाव हो तुममे-
    हर जीव में ईश्वर को देखो !!
    सुभाष सदृश नेतृत्व का गुण हो
    भगत सिंह की मेधाशक्ति हो
    निर्भीक बनो तुम ‘चन्द्र शेखर’ सा
    बिस्मिल, बटुक सा त्याग शक्ति हो !!
    राणाप्रताप सा स्वाभिमानी हो
    वीर शिवा सा बलिदानी हो
    मात्रृभूमि की रक्षा हित
    सिख, मराठों सा अभिमानी हो !!
    देश की इच्छा, देश की रक्षा
    देश प्रेम में हर इक परीक्षा
    ऐतिहासिक गौरव से अनुप्राणित-
    आत्मबोध की हर इक शिक्षा !!
    ‘दया-विवेकानन्द’ को धारण कर लो
    आर्यावर्त के हर संताप को हर लो
    विस्तृत होवो सिन्ध से शिलांग तक
    कश्मीर-केरल को एक सा कर लो !!
    मणिपुर, नागालैंड, आसाम, बंगाल में
    सत्य सनातन की संस्थापना कर दो
    सेवा-शिक्षा, कार्य समर्पण के दम पर
    आर्य संस्कृति पुनः अवतारित कर दो !!
    अपनी संस्कृति, आर्य संस्कृति
    अपनी सभ्यता ‘सप्त-सैन्धव’
    अपनी रचना-उपनिषद गीता
    आध्यात्म सम्पन्न अपना वैभव !!
    गर्व करो तुम ‘भारत’ में जन्में
    शस्य श्यामला धरती पर खेले
    न इतनी समृद्ध आध्यात्म- विरासत
    न कहीं ऐसा पवित्र संस्कार मिले ।।
    ‘सम्पूर्ण मानवी बनने में
    यह धरती है स्वयं सहायक’
    रामायण-गीता में भगवान कह गए
    कह गए सरस्वती के अमर गायक ।।
    ……………………………….
    स्वरचित एवं मौलिक
    ✍️बृजेश आनन्द राय राय,जौनपुर,उत्तर प्रदेश
    भारत।मो.9451055830
    ……………………………….

Last Updated on January 11, 2021 by brijeshanandrai

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