न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

महिला दिवस काव्य प्रतियोगिता

नारी तूं सच में बलशाली।

नारी हर परिवार की धुरी,

सुबह से शाम,

सबको घुमाती,

सारा प्रबंध करती,

फिर आखिर में आराम करती,

इसलिए ये परिवार की सीईओ कहलाती,

नारी तूं सच में बलशाली।

 

अगर एक दिन तूं हो जाए अनुपस्थित,

सबकी अक्ल ठिकाने आ जाती,

जब सुबह से शाम लगती दौड़,

अच्छे अच्छों को आते फिर होश,

नारी का होता वोध,

नारी तूं सच में बलशाली।

 

अगर आ जाए घर में बिमारी,

तो तूं चिकित्सक बन जाती,

डट जाती रात दिन,

जब तक बिमारी भाग न जाती,

नारी तूं सच में बलशाली।

 

अगर हो बच्चों को पढ़ाना,

तूं बन जाती अध्यापिका,

फिर बच्चों को ऐसे ऐसे घुर सिखाती,

सब अध्यापकों पे पड़ती भारी,

इसलिए तूं पहली गुरु कहलाती,

नारी तूं सच में बलशाली।

 

अगर करना हो किसी का आदर सत्कार,

नारी पे आता सबका ध्यान,

उसको सौंपा जाता ये काम,

और तूं उसमें भी सफल हो जाती,

नारी तूं सच में बलशाली।

 

अगर संभालना हो परिवार का वित्तीय विभाग,

नारी जैसा न हो दुसरा विकल्प,

जब कभी पड़ती पैसे की आवश्यकता,

तूं तूरंत आगे बढ़कर काम आ जाती,

नारी तूं सबसे बलशाली।

ये तो रही इंसानों की बात,

नारी के आगे तो भगवान भी नतमस्तक,

अगर तूं ठान लें कुछ करने की,

भगवान भी नहीं रोक पाते तेरा दृढ़ निश्चय, नारी तूं सच में बलशाली।

 

जब इतनी प्रतिभाओं से संपन्न,

हर काम में निपुण,

परिवार की धूरी,

समाज की रीढ़ की हड्डी,

तो फिर सब मिलकर क्यों न करें इसका गुणगान,

और बोलें,

नारी तूं सचमुच महान,

नारी तूं हैं दुनिया की शान,

नारी तूं हैं सच में बलशाली।

 

Last Updated on January 3, 2021 by aniljaswal0

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

More to explorer

रश्मिरथी

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱जा रे जा,जिया घबराए ऐ लंबी काली यामिनी आ भी जा,देर भई रश्मिरथी मृदुल उषा कामिनी काली

मोटनक छन्द “भारत की सेना”

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱(मोटनक छन्द) सेना अरि की हमला करती।हो व्याकुल माँ सिसकी भरती।।छाते जब बादल संकट के।आगे सब आवत

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *