न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

चलते रहना ही जीवन है…!

शीर्षक : “चलते रहना ही जीवन है”

देख हिमालय सी कठिनाई,
क्यूं राहों का परित्याग किया,
अथक परिश्रम करते करते,
बढ़ते रहना ही जीवन है…!
चलते रहना ही जीवन है…!!

ठहराव अगर जल में हो,
जल की निर्मलता कैसे हो…??
पग पग ही सही… पल पल ही सही,
बहते रहना ही जीवन है…!
चलते रहना ही जीवन है…!!

एकांत वरण कर लोगे तुम,
अवसाद ग्रसित हो जाओगे,
व्यक्तित्व निखर पाए तेरा,
मिलते रहना ही जीवन है…!
चलते रहना ही जीवन है…!!

अन्याय कपट की लंका में,
रावण ही रावण भरे पड़े,
राम – भाव के अस्त्रों से,
लड़ते रहना ही जीवन है…!
चलते रहना ही जीवन है…!!

चीर हरण करने वाले,
अगनित दुर्योधन बैठे हैं,
ऐसे कापुरूषों असुरों से,
भिड़ते रहना ही जीवन है…!
चलते रहना ही जीवन है…!!

हो लाख कठिन कठिनाई,
मानव का जन्म मिला हमको,
गिर कर उठना, उठ कर चलना,
प्रभु से वरदान मिला हमको,

जीवन के हर इक दुख में बस,
हसते रहना ही जीवन है…!!
चलते रहना ही जीवन है…!!!

सादर,

Last Updated on January 22, 2021 by rtiwari02

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

More to explorer

रश्मिरथी

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱जा रे जा,जिया घबराए ऐ लंबी काली यामिनी आ भी जा,देर भई रश्मिरथी मृदुल उषा कामिनी काली

मोटनक छन्द “भारत की सेना”

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱(मोटनक छन्द) सेना अरि की हमला करती।हो व्याकुल माँ सिसकी भरती।।छाते जब बादल संकट के।आगे सब आवत

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *