न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

नंगे पाँव

आजकल शहरों में लोग 

नंगे पाँव नहीं चलते 

कुछ तो घर में भी 

नंगे पाँव नहीं रहते 

बिस्तर से उठने से लेकर 

खाने की टेबल तक 

पाँव ज़मीन को नहीं छूते 

फ़र्श पर कालीन बिछा होता है तब भी 

पाँव के तले चप्पल ही होती है 

पता नहीं क्या हो गया है कि

नंगे पाँव चलने वाला असभ्य समझा जाने लगा है 

बड़ा अजीब लगता है 

शरीर की नग्नता से प्रसिद्धि मिलने लगी है 

वैचारिक नग्नता बुद्धिमत्ता बन गई है 

व्यवहारिक नग्नता को कुछ लोग ऐटीट्यूड बताते हैं 

लेकिन नंगे पाँव रहनेवाला आदमी 

छोटा बन जाता है …

 

गीता टंडन 

 

Last Updated on January 30, 2021 by geetatandon1

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

More to explorer

रश्मिरथी

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱जा रे जा,जिया घबराए ऐ लंबी काली यामिनी आ भी जा,देर भई रश्मिरथी मृदुल उषा कामिनी काली

मोटनक छन्द “भारत की सेना”

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱(मोटनक छन्द) सेना अरि की हमला करती।हो व्याकुल माँ सिसकी भरती।।छाते जब बादल संकट के।आगे सब आवत

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *