न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

वह बेचती थी गुटका भग —2

आते जाते गुटखा शौख के
नाते अधेड़ उम्र की औरत
की दुकान से भाव भावना
का हो गया लगाव।।
अधेड़ उम्र उस औरत ने भी
मुझे अपनी दुकान का नियमित
ग्राहक लिया मान।।
जब कभी हो जाता गुटके
की दुकान पर पहुँचने में एक
दो दिन का भी अंतराल।।
जाने पर करती प्यार से सवाल
जैसे बचपन मे माँ करती थी
सवाल ।।
बेटा कहाँ चला गया था
देर हो गयी तुमने अभी तक नहाया
नही कुछ खाया नही तू हो गया है
शरारती लापरवाह।।
माँ सा ही भाव उस अधेड़ उम्र की
औरत का करती सवाल बाबू का
बात है दुई दिन दिखाई नाही दिए।।

तबियत त ठिक रही घर पर सब
कुशल मंगल बा मुझे भी बचपन
याद आ जाता माँ का कान ऐंठना
डांटना खुद की शरारते बचगाना।।

 

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

Last Updated on February 18, 2021 by nandlalmanitripathi

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

More to explorer

आँगन में खेलते बच्चे

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱आँगन में खेलते बच्चे आँगन में खेलते रंग-बिरंगे बच्चे,लगते कितने प्यारे कितने अच्छे !फूलों-सी मुस्कान है-चेहरों परऔर

देखो मेरे नाम सखी

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱देखो मेरे नाम सखी “   प्रियतम की चिट्ठी आई है देखो मेरे नाम सखी विरह वेदना

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *