न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

गांव

1-गाँव की माटी प्रकृति—
सुबह कोयल की मधुर तान
मुर्गे की बान सुर्ख सूरज की
लाली हल बैल किसान गाँव
की माटी की शोधी खुशबू भारत
की जान प्राण।।
बहती नदियां ,झरने झील,तालाब
पगडंडी पीपल की छाँव
बाग़ ,बगीचे विशुद्ध पवन के
झोंके भावों के रिश्तों के ठौर
ठाँव गाँव की माटी की शान।।
भोले भाले लोग नहीं जानते
राजनिति का क्षुद्र पेंच दांव
एक दूजे के सुख दुःख के साथी
गाँव की माटी का अलबेला रीती
रिवाज।।
जाती धर्म अलग अलग मगर
बड़े उमंग से शामिल होते मिल
साथ मनाते एक दूजे का तीज
त्यौहार।।

2–गाँव की माटी और जन्म का रिश्ता—

गाँव की मिट्टी की कोख से
जन्मा भारत हिन्द का हर
इंसान चाहे जहाँ चला जाए
गाँव की मिट्टी ही पहचान।।

पैदा होता जब इंसान पूछा
जाता माँ बाप कौन ,कहाँ
जन्म भूमि का कौन सा गाँव
गाँव गर्व है गाँव गर्भ है
गांव की माटी का कण कण
ऊतक टिशु सांसे धड़कन प्राण।।
उत्तर हो या दक्षिण पूरब हो
या पक्षिम गाँव से ही पहचान
कहीं नारियल के बागान कहीं
चाय के बागान सेव ,संतरा ,अंगूरों
की मिठास खुसबू में भारत के कण कण का गाँव।।
त्याग तपस्या बलिदानो की
गौरव गाथा का सुबह शाम
गाँव की माटी का अभिमान।।
आजाद ,भगत ,बटुकेश्वर, बिस्मिल या लालापथ राय बल्लभ पटेल ,या राजेन्द्र प्रसाद चाहे लालबहादुर सब भारत के गाँवो की माटी के लाल।।

3–गांव की माटी वर्तमान और इतिहास—–

इतिहास पुरुष हो या वर्तमान
गाँव की माटी के जर्रे का जज्बा
बचपन नौजवान ।।
सुखा ,बाढ़ मौसम की मार
विषुवत रेखा का भी गाँव जहाँ
अग्नि की वारिश भी लगाती है
शीतल छाँव।।
लेह ,लद्दाख ,लाहौल, गंगोत्री हिम
हिमालय की गोद में बसे गाँव
हर दुविधा दुश्वारी भी प्यारी
नहीं चाहता छोड़ना क़ोई अपना
गाँव।।
गाँव की मिट्टी का पुतला गाँव का वर्तमान गाँव की परम्परा में ही
खुश गाँव की माटी पर ही प्रथम
कदम गाँव की मिटटी में ही चाहत
लेना अंतिम सांस।।
गाँव आँचल बचपन का कागज
की कश्ती वारिश का पानी का
गाँव परेशानी बदहाल गॉव हर
हाल में जन्नत से खूबसूरत जननी
जन्म भूमि स्वर्गादपि गरिष्येते गाँव की माटी जीवन का प्रारम्भ
अंतिम सांस की माटी गाँव।।

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

Last Updated on February 20, 2021 by nandlalmanitripathi

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

More to explorer

पूछते हो मैं कौन हूं….

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱मैं अर्पण हूं,समर्पण हूं, श्रद्धा हूं,विश्वास हूं। जीवन का आधार, प्रीत का पारावार, प्रेम की पराकाष्ठा, वात्सल्य

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *