न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

एस. डी. तिवारी की कविता – ‘श्रमिक’

Spread the love
image_pdfimage_print
पत्थर तोड़कर भी,
नाम मिला ना दाम मिला।
बस छोटा सा काम मिला।
सर्दी व बारिश गहरी में,
गर्मी की दोपहरी में,
कभी सड़क बनी, कभी महल बना,
तनिक नहीं आराम मिला। बस छोटा सा …
इतना सारा परिश्रम कर,
कमा पाता बस पेट भर,
झोपड़ों में करता है बसर,
उसको न अपना धाम मिला। बस छोटा सा …
बीमारी उसकी हवा हो जाती,
पसीने से ही दवा हो जाती,
श्रम के धन पर इतराता;
खाने को नहीं हराम मिला। बस छोटा सा …
हाथ का लिए भरोसा भागे,
फैलाता ना किसी के आगे,
संतुष्टि उसके मन से झांके,
पर झंझट और झाम मिला। बस छोटा सा …
– एस. डी. तिवारी, एडवोकेट

Last Updated on January 4, 2021 by srijanaustralia

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn

More to explorer

थर्ड जेंडर

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱  तुम क्या कहोगे मुझे?  पहचान के लिए एक अदना सा शब्द तो दे

सौ सौ अफसाने हैं

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱नवगीत सबका अपना तौर-तरीकासबके अपने पैमाने हैं। हैं कई सभ्यताएँऔर उनमें संघर्ष है।कैसे होगा

अफलातून लगा है

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱22 22 22 22ग़ज़ल वह तो अफलातून लगा है।पशुता गर नाखून लगा है।। भ्रष्टाचार

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!