न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

मनोरंजन तिवारी की कहानी – ‘एहसास’

एक रात जब मैं घर पहुँचा  तो मेरी पत्नी ने मेरे लिए खाना परोसा।  मैंने उसका हाथ पकड़ कर कहा कि मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। वह बैठ गई और चुप-चाप खाना खाने लगी। लेकिन मुझे उसके चेहरे पर दर्द की  झलक दिखी। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं उससे कैसे कहूँ की मुझे उससे तलाक चाहिए। लेकिन मुझे तो कहना ही था।  मैंने ठंडे दिमाग से बात शुरू की और अपनी इच्छा बता दी।  उसके चेहरे पर कोई नाराज़गी के भाव तो नहीं आए, मगर उसने वैसे ही शांतचित रहते हुए पूछा क्यों?

मैंने उसके प्रश्न को कोई तवज्जो नहीं दिया।  इस पर वह भड़क उठी और वहाँ पड़े बर्तन को उठा कर मेरी तरफ दे मारा,और बड़बड़ाते हुए बोली ” तुम मर्द नहीं हो”। 

फिर उस रात हम दोनों में कोई बात नहीं हुई।  वह बिस्तर पर पड़ी रोती रही।  मैं जानता था कि वह जानना चाहती थी की आखिर हुआ क्या है, मगर मैं कोई सही कारण बता सकने में असमर्थ था।  वास्तव में कारण यह था कि  मैं किसी और स्त्री से प्रेम करने लगा था और मेरे दिल में मेरी पत्नी के लिए कोई जगह नहीं बची थी। मैं सिर्फ उसे बेवकूफ़ बना रहा था और हाँ उसके साथ धोखा भी कर रहा था।

अगले दिन अपराधबोध महसूस करते हुए भी मैंने तलाक के कागज़ात तैयार करवा दिए जिसमें मैंने अपनी पत्नी को एक घर, एक कार और अपनी  कंपनी में 30 %  की हिस्सेदारी देने की बात थी, मगर जब मैंने तलाक के वो कागज़ात को अपनी पत्नी को दिए तो उसने वो कागजात फाड़कर टुकड़े-टुकड़े कर दिए और फिर बिल्कुल अजनबी की तरह खड़ी  रोती रही। 

मैं जानता था कि उसने मुझे अपने दस साल दिए थे। अपना समय, सम्पदा और ऊर्जा सब कुछ दिया, मगर उसके इस बर्बाद हुए समय को तो मैं लौटा नहीं सकता था। मैं अपनी महिला मित्र से बहुत गहरा प्रेम करने लगा था और  मैं जनता था कि उसके आँसू एक तरह से मुझे आज़ाद कर रहे थे उन उलझनों से जिनमें मैं पिछले कई सप्ताह से उलझा हुआ था। उसके आँसुओं ने हमारे तलाक के बारे में मेरे विचार को और अधिक स्पष्ट एवं और अधिक मजबूत कर दिया था।

अगली रात को मैं बहुत देर से घर आया। बहुत थके होने के कारण सीधे बिस्तर में चला गया।  मैंने देखा कि मेरी पत्नी टेबल पर बैठी कुछ लिख रही है।  मगर मैंने उसकी तरफ जरा भी ध्यान नहीं दिया और सो गया।

काफ़ी रात गुजरने के बाद मेरी नींद खुली तो देखा वह तब भी टेबल पर बैठी लिख रही है। मैंने करवट बदलकर अपना चेहरा दूसरी तरफ किया फिर से सो गया।

अगली सुबह वह तलाक के लिए अपनी शर्तों के साथ मेरे सामने प्रस्तुत हुई। उसने उसमें लिखा था कि उसे मुझसे कुछ भी नहीं चाहिए। सिर्फ एक महीने का नोटिस चाहिए। और इस एक महीने में हम दोनों बिल्कुल सामान्य बने रहने की कोशिश करेंगे। 

ऐसा करने के पीछे कारण यह था कि हमारे बेटे की परीक्षा अगले एक महीने में संपन्न होने वाली थी और वह नहीं चाहती थी कि हमारे टूटते हुए या ये कहें कि टूटे हुए रिश्ते का कोई असर हमारे बेटे पर हो। यह तो बहुत अच्छी बात थी। मैंने उसकी  उस शर्त को  स्वीकार कर लिया।

तलाक के लिए उसकी कुछ और भी शर्ते थीं। उनमें से एक था कि जिस तरह मैं  उसे शादी के दिन अपने बाँहों में लिए हुए बाहर से अंदर और फिर बेड रूम में ले गया था, ठीक उसी तरह अगले एक महीने तक मुझे उसे वैसे ही बाँहों में लेकर अंदर बेड रूम से बाहर बैठक तक और फिर घर के बहार तक छोड़ना था। ये शर्त सुन कर पहले तो मुझे लगा की यह पागल हो गई है मगर किसी तरह एक महीना तक मैनेज करने के लिए मैं राज़ी हो ही गया।

जब मैंने तलाक के लिए अपनी पत्नी की शर्तों को अपनी महिला मित्र को बताया तो वह ठहाका लगा कर हँसने लगी, और बोली कि वह अब कुछ भी जतन कर ले लेकिन उसका तलाक तो अब होकर ही रहेगा।

मेरा अपनी पत्नी के साथ काफी अर्से से कोई शारीरिक संपर्क नहीं था।  अगली सुबह जब शर्त के अनुसार मैं उसे अपनी बाँहों में लेकर बाहर गया तो हम दोनों को बहुत संकोच हुआ। मेरा बेटा, हमारे पीछे से खड़ा होकर हँसता हुआ ताली बजा रहा था ये सोच कर कि उसके पापा उसकी माँ को बाँहों में लेकर चल रहे हैं। ये सोच कर मुझे बहुत तकलीफ़ हुई। मेरी पत्नी ने बहुत प्यार से मुझे कहा कि हमारे टूटे हुए रिश्ते के बारे में मैं अपने बेटे को कभी भी न  बताऊँ। मैंने उसे दरवाज़े के बाहर छोड़ दिया। वहाँ से वह अपने ऑफिस चली गई और मैं अपनी गाड़ी लेकर अपने ऑफिस चला गया।

दूसरे दिन जब मैं अपनी पत्नी को बाँहों में लेकर बाहर जाने लगा तो मुझे उसके ब्लाउज से खुशबू आई और मुझे महसूस हुआ कि एक लम्बे समय से मैं उस पर ध्यान ही नहीं दे रहा था।  वह अब जवान नहीं रह गई थी। कुछ झुर्रियों जैसे निशान और सफ़ेद बाल दिखने लगे थे उसके।  उसने जो अपने दस साल मुझे दिए, उसके लिए मुझे दुःख हो रहा था।

चौथे दिन मुझे महसूस हुआ कि हमारे बीच अपनापन और नजदीकियाँ वापस आने लगी हैं  लेकिन मैंने कुछ भी नहीं कहा और उसे दरवाजे के बाहर छोड़ कर ऑफिस के लिए निकल गया।

इसी तरह हर रोज-रोज यह क्रिया हम करते-करते मुझे ऐसा महसूस हुआ कि वह दिन-प्रतिदिन कमजोर और हल्की होते जा रही है वहीं दूसरी ओर इस लगातार व्यायाम से मैं ताकतवर होता  जा रहा था।

एक सुबह मेरी पत्नी ने पहनने के लिए ड्रेस चुनने को कहा।  वह एक-एक करके हर ड्रेस को पहन कर देखती जा रही थी मगर उसके कमज़ोर और दुबली-पतली होने के कारण उसी के ड्रेस उस पर फिट नहीं हो रहे थे।  मैं यह सोच कर बहुत व्यथित हुआ कि मेरी पत्नी ने अपने दर्द और तकलीफों को इस तरह अपने अंदर छुपा लिया है कि  इसका असर उसके सेहत पर हो रहा है, वह हर रोज दुबली और हल्की होते जा रही है, तभी तो मैं उसे आसानी से उठा पाता हूँ। तभी मेरा बेटा आकर बोला ” पापा, मम्मी को बाँहों में उठा कर बाहर छोड़ने का समय हो गया।मेरी पत्नी ने बेटे के तरफ प्यार से देखा और अपने पास बुला कर अपने बाँहों में ले लिया। मैंने अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया, क्योंकि मुझे महसूस हुआ की इस क्षण मैं इतना कमज़ोर हो रहा था की, शायद अपना फ़ैसला बदल देता।

आख़री दिन जब मैं, अपनी पत्नी को बाँहों में लेकर चला तो मेरे पैर ही नहीं उठ रहे थे, मुझे उस दिन उसका इतना हल्का होना,मुझे इस कदर दुःखी कर दिया की मेरे आँसू बहने लगे, मैंने उसे और जोर से अपनी बाँहों में पकड़ते हुए सिर्फ इतना कहा ” मुझे अब समझ आ रहा है की, हमारे रिश्ते में नजदीकी (intimasy ) की बहुत कमी हो गई थी, फिर मैंने उसे दरवाज़े के बाहर छोड़ कर तेज़ी से अपनी गाड़ी लेकर निकल गया, मैं बहुत तेज़ जा रहा था, ऐसा लग रहा था की कहीं देर न हो जाए।

मैं लगभग दौड़ते हुए अपनी महिला मित्र के घर गया और जाते ही कहा, मुझे माफ़ कर दो, मैं अपनी पत्नी से तलाक नहीं ले सकता। मेरी महिला मित्र ने थोड़ा चिंतित होकर मेरे ललाट पर हाथ रखते हुए बोली ” तुम्हे बुख़ार तो नहीं न आ रहा? क्या तुम ठीक हो?

मगर मैंने उसके हाथ को दूर हटा कर कहा, हाँ मैं बिल्कुल ठीक हूँ अब, लेकिन मैं अपनी पत्नी से तलाक नहीं लेना चाहता, और ये मेरा फ़ैसला है, क्योंकि मुझे अब समझ में आ गया है की,मैं अपनी पत्नी से इसलिए तलाक नहीं रहा था, क्योंकि मैं उससे प्यार नहीं करता, बल्कि इसलिए तलाक ले रहा था, क्योंकि हम दोनों ने एक-दूसरे के बारे में छोटी-छोटी बातों को देखना भूल गए थे, मैं अभी भी अपनी पत्नी से ही प्यार करता हूँ, तुमसे सिर्फ मेरा शारीरिक आकर्षण है, जो प्यार जैसा लग रहा है। यह सुन कर मेरी महिला मित्र ने मुझे एक जोर का थप्पड़ मारा और रोते हुए मुझे बाहर निकाल कर मेरे मुँह पर धड़ाम से दरवाज़ा बंद कर दिया।

मैं दौड़ते हुए फूल और बुके की दुकान पर गया और अपनी पत्नी के लिए खूबसूरत फूलों का एक बुके बनाने को कहा। वहाँ खड़ी सेल्स गर्ल ने पुछा की इस पर क्या लिखना है सर? तो मैंने अपनी पत्नी को सम्बोधित करते हुए लिखा ” मैं तुम्हे हर सुबह इसी तरह बाँहों में लेकर बाहर छोडूगा जब तक की मौत हम दोनों को अलग ना कर दे”

उस सायं को जब मैं घर पहुँचा तो हाथों में फूलों के ग़ुलदश्ता लिए, चेहरे पर मुस्कुराहट लिए दौड़ते हुए सीढ़ियाँ चढ़ कर बेडरूम में गया तो देखा, मेरी पत्नी वहाँ मरी पड़ी है। मेरी पत्नी को कैंसर आखरी स्टेज पर था, और मैं अपनी महिला मित्र के साथ इसकदर मौज़-मस्ती में उलझा रहा की, अपनी पत्नी के ख़राब होते सेहत पर ध्यान भी ना दे सका। मेरी पत्नी जानती थी की, वह सिर्फ कुछ दिनों तक जीवित रहने वाली है है, इसी लिए उसने मेरे साथ तलाक का इस तरह का शर्त रखा था, जिससे हमारे बेटे को लगे की हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते है। वह चाहती थी की उसके मौत के बाद मेरा बेटा एक अच्छा पति और पिता के रूप में जाने ना की कोई नकारात्मक बात उसके मन में आए।

हमारे जीवन में धन-सम्पति, कार , बंगला ये सब जीवन को आसान तो बना देते है, मगर एक खुशहाल जीवन नहीं बना सकते, खुशहाल जीवन के लिए हम सबको एक-दूसरे की छोटी-छोटी बातों, छोटी-छोटी खुशियों का ख्याल रखना चाहिए।

Last Updated on January 2, 2021 by srijanaustralia

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