न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

मैं

‘मैं’, मैं को ढूंढ रही थी,

नगर-नगर गली, गली, घूम रही थी,

‘मैं’ की तलाश जारी थी,

अब खुद के अंदर देखने की बारी थी,

कस्तूरी मृग की नाभि में थी,

मृगी इधर-उधर भाग रही थी,

हे प्रभु! तो ये मेरे अंदर की नारी थी,

सुला दी गई ,जो बेचारी थी।

सामने मुक्त आकाश था,

अब उड़ने की बारी थी

अभिव्यक्तियाँ निकल निकल,

पन्नों पर इंद्रधनुष बना रही थीं,

सोई हुई कलाओं को, जगा रही थीं,

नाच रही थी, मैं झूम रही थी,

चेहरे पर खुशी छाई थी,

लौटी जब आज घर,हाथों में सम्मान पत्र,

और गुलाबों का गुलदस्ता,

गले मे सम्मानसूचक हार, देखो तो—-

घर मे घुसते ही चिल्लाया था

पर ड्रॉइंग रूम में किसी को न पाया था,

दोनो बेटे थे किचन में,

एक बना रहा था ऑमलेट,

दूजे ने गैस पर चाय चढ़ाया था,

उड़ चली चेहरे की खुशी कपूर सी

हटा उनको, खुद नाश्ता बनाया था,

चेहरे पर स्वेद कण, और संतोष के क्षण,

और शायद हाँ, हाँ शायद,

वो मिल रही थी अब उस ‘मैं’ से,

जिसे जबरन सुला, छाया को जगाया था,

आंतरिक प्रसन्नता को छोड़,

सतही खुशी को अपनाया था।

रश्मि सिन्हा

मौलिक रचना

Last Updated on January 7, 2021 by rashmisahai.sinha

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