न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

प्रेम-काव्य लेखन प्रतियोगिता

कविता   

जाने क्यों?

जाने क्यों लगता है,

भूलाने लगे हो तुम मुझको,

वक्त की गीली मिट्टी के आगोश में,

बेवजह दफन कर्नर लगे हो मुझको ,

संग तुम्हाते मैं तो चल देती,

प्रीत के दर्पण में  रच-बस कर,

दुनिया बसा लेती अपनी,

मगर वक्त के हाथों,

बार-बार छलने लगे हो मुझको,

जाने क्यों?

चलो आज फिर 

पुकार लो मुझे एक बार फिर तुम,

बहारों की सिलवटों में 

सिमटा कर मुझे 

दूर से दूरियों का एहसास

तुम मिटाने दो मुझको ,

कभी पास से गूजरों तो 

एहसास ये हो जाए,

नजर भर,धड़ी भर

दो बात हो जाए ,

मुलाकत  का दौर  जाने कब खत्म हुआ ,

इबादत की भोर से 

तुम्हारा साक्षात्कार हो जाए,

क्यों लगता है जहन को,

आजकल प्रतिद्वंदी मेरे दिल को ,

अपने दिल से तुम बनाने लगे हो मुझे |

जाने क्यों लगता है,

भूलाने लगे हो तुम मुझको,

वक्त की गीली मिट्टी के आगोश में,

बेवजह दफन कर्नर लगे हो मुझको ,

डॉ  कविता यादव 

 

 

Last Updated on January 20, 2021 by drkavitayadav42

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