न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

*अयोध्या में संतो संग हिन्दू-मुस्लिम खेलें रंग होली*

*अयोध्या में संतों संग हिन्दू-मुस्लिम खेलें रंग होली*
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रचयिता :

*डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

 

खेलें हिन्दू मुस्लिम मिल कर होली,
अयोध्या में राम लला के घर होली।

भाई इकबाल व अनीस खेलें होली,
गंगा जमुनी संस्कृति की यह होली।

प्यार एवं भाईचारे की अनुपम होली,
अयोध्या खेल रही एकता की होली।

हिन्दू मुस्लिम एक दूजे के रंग होली,
डारें अबीर गुलाल और खेलें होली।

ब्रज में खेलें मथुरा बरसाने में होली,
अयोध्या में भी खेलें संग संग होली।

यह है अपने देश परिवेश की होली,
गुझिया पापड़ चिप्स की यह होली।

विविध रंग भरी पिचकारी की होली,
तन मन वस्त्र में बहुरंगों की है होली।

गले मिलें सब ये बोलें होली है होली,
अवध में खेलें रघुवीर संग सब होली।

लड्डू,लठमार,रंग,फूलों की ये होली,
बृज बरसाने में खेलें कृष्ण संग होली।

रूप धरे हैं राम लक्ष्मण की इस होली,
कृष्ण रूप धरे गोपियों संग की होली।

दिलों से दिल को मिलाती यह होली,
ये फ़ाग अनेक रंग बरसाती ये होली।

ढोल व झांझ मंजीरा बजे इस होली,
लक्ष्मण के हाथ अबीरा है इस होली।

श्रीराम की नगरी अयोध्या की होली,
युग युग से प्रेम सौहार्द्र की रही होली।

खुशियों के संग मिलकर खेलो होली,
अमन चैन से बीते यह रंग पर्व होली।

होली उत्सव है भाई ये होली है होली,
करो ठिठोली देवर भौजाई की होली।

होली है जीजा व साली की यह होली,
सरहज और नंदोई की भी है ये होली।

भाई और भाई की यह प्रमुदित होली,
छोटे बड़े वृद्ध महिला पुरुष की होली।

बच्चों के रंग भरे गुब्बारों की ये होली,
उछल कूद कर रंग लगाने की है होली।

मन को मन से मिलाने की है ये होली,
दुश्मनी शत्रुता सब भुलाने की होली।

रंगों का पर्व हँसी ख़ुशी मनाना होली,
मन आह्लादित करती रही है ये होली।

 

रचयिता :

*डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर-नार्थ इंडिया
एलायन्स क्लब्स इंटरनेशनल,कोलकाता,प.बंगाल
संपर्क : 9415350596

Last Updated on March 27, 2021 by dr.vinaysrivastava

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